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Interesting Facts: गंगा नदी का पानी खराब क्यों नहीं होता? – क्या है वैज्ञानिक तर्क?

Interesting Facts: भारत की सबसे लंबी नदी गंगा भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक है। 2525 किलोमीटर लंबी यह नदी भारत के कई क्षेत्रों को सिंचित करती है। न सिर्फ कृषि क्षेत्र में क्रांति के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को भी संजोए हुए है।

गंगा नदी से जुड़ी वैसे तो कई दिलचस्प जानकारियाँ पढ़ने को मिल जाती हैं, लेकिन आज आपके मन में जो एक सवाल शायद कभी ना कभी आया होगा कि गंगा नदी का पानी कभी खराब क्यों नहीं होता? आखिर इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण है? शोधकर्ताओं ने कई सालों में इस पर रिसर्च की और जो निष्कर्ष निकले, उन्हें जानना बेहद ज़रूरी है।

Interesting Facts
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आखिर क्यों नहीं होता गंगा का पानी खराब

गंगा के पानी का खराब ना होना कई कारकों पर निर्भर करता है:

1. बैक्टीरियोफेज वायरस

गंगा नदी के जल में बैक्टीरियोफेज नामक विशेष प्रकार का वायरस पाया जाता है। इसे “निंजा वायरस” भी कहा जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह पानी में पनपने वाले हानिकारक बैक्टीरिया यानी जीवाणुओं को खाकर खत्म कर देता है। जब भी गंगा नदी के पानी में गंदगी या बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया बढ़ते हैं तो यह वायरस उन्हें नष्ट कर देता है। यही वजह है कि गंगा नदी के पानी में सड़न पैदा नहीं होती।

2. ऑक्सीजन की अधिक मात्रा

वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार गंगा नदी के पानी में ऑक्सीजन सोखने की अद्भुत क्षमता है। अन्य नदियों की तुलना में गंगाजल में लगभग 25% अधिक ऑक्सीजन होता है। ऑक्सीजन का यह उच्च स्तर हानिकारक बैक्टीरिया को जीवित रहने और पनपने से रोकता है।

3. खनिज और जड़ी-बूटियों का प्रभाव

गंगा नदी हिमालय के ऊँचे पहाड़ों से बहती हुई समतल इलाकों तक पहुँचती है। हिमालय में कई तरह की औषधीय जड़ी-बूटियाँ और विशेष खनिज जैसे सल्फर और मैग्नीशियम पाए जाते हैं। इनके संपर्क में आने से यह तत्व पानी में प्राकृतिक रूप से घुल जाते हैं। यही एक बड़ी वजह है जो इसके पानी को लंबे समय तक शुद्ध रखने में मदद करती है। यह तत्व पानी में एंटी-बैक्टीरियल गुण पैदा करते हैं।

4. स्व-शुद्धिकरण की क्षमता

गंगा की रेत और मिट्टी में विशेष तरह के गुण पाए जाते हैं जो पानी को साफ रखने में सहायक होते हैं। एक रिसर्च के अनुसार गंगा नदी का पानी अन्य नदियों की तुलना में 50 गुना तेजी से खुद को साफ करने की क्षमता रखता है।

गंगा नदी से जुड़े अन्य रोचक तथ्य

  • गंगा नदी का ब्रह्मकमल क्षेत्र: गंगा नदी हिमालय के गंगोत्री ग्लेशियर यानी गोमुख से निकलती है। समुद्र तल से इसकी ऊँचाई 3892 मीटर है। शुरुआती जल में खनिजों की सांद्रता बहुत अधिक होती है जो इसे प्राकृतिक रूप से फ़िल्टर करती है।
  • दुर्लभ गंगा डॉल्फिन: गंगा नदी के मीठे पानी में दुर्लभ डॉल्फिन पाई जाती है जिसे “सुसू” कहा जाता है। इसे भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव भी घोषित किया गया है। यह डॉल्फिन प्राकृतिक रूप से अंधी होती है और शिकार करने के लिए अल्ट्रासोनिक तरंगों का उपयोग करती है।
  • दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा: गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियाँ मिलकर बंगाल की खाड़ी में दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा बनाती हैं जिसे सुंदरबन डेल्टा कहा जाता है।
  • गंगा नदी को मिला जीवित इकाई का दर्जा: 2017 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गंगा और यमुना नदियों को जीवित मानवीय इकाई का दर्जा दिया था। इस नदी को भी वही कानूनी अधिकार प्राप्त हैं जो एक इंसान के होते हैं।

डिसक्लेमर:- हमारे द्वारा प्रदान की गई यह जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यद्यपि हमने गहन शोध के पश्चात इसे आप तक पहुँचाया है, तथापि इसमें मानवीय त्रुटियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। धन्यवाद।

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